मंगलवार, 22 सितंबर 2009

बता मैं सड़क की तरफ क्यों देखती हूं


वह कली और फूल के बीच में कहीं रहती थी। यूं कि उसका चेहरा फूलों और कलियों के बीच की सुंदरता में कहीं महकता था। जैसे ईश्वर ने उसे बनाते हुए यथार्थ के साथ थोड़ी सी कल्पना डाल दी थी। आंखों ओठों और गालों पर वैसा ही परिवर्तन फैला रहता जैसा फूलों से भरी शाख के चारों तरफ होता। उसे मैं तो मित्रो कहता था. मगर मेरे दोस्त- ‘यार क्या कली है!’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे. उनके इस संबोधन को लेकर मै अंदर से ंिचंतित हो जाता था मगर उसने शिकायत नहीं करता था. हमारी तिकड़ी चौकड़ी का एक हिस्सा मनोज का विचार अलग था। वह कहता था कि यह लड़की मेंटली रिटार्टिड है. क्योंकि यह छत पर गमलों के बीच बिना हिले खड़ी रहती है और गप भी सुना दी कि एक दिन मैंनें उसे गमले में उगी हुई लड़की की तरह देखा. उस दिन उसके बालों से पानी के मोती टपक रहे थे, उस पर किसी ने उस पर सूर्य-अर्ध्य का चढ़ाया हो... हम तीनों चारों दोस्त अक्सर सुबह उठते और नौ बजे तक गली के एंगल पर खड़े हो जाते। करने को कुछ था नहीं। पढ़ाई ऐसे चलती थी जैसे सरकारी कालेज। हम तो प्रायवेट कालेज में थे। हमें पता था कि कालेज द्वारा एवेलेबल नोट्स की बिना पर परीक्षा की जंग जीत जाएंगे। हम पैरोडी भी बनाते थे- जीत जाएंगे हम जीत जाएंगे हम, नोट्स अगर संग हैं... दीपेश ने कहा ये पुरानी बात है। तुम आज की बात करो. यार मित्रो इज एकदम सनफ्लावर. आज मैंनें उसे छत पर सुबह की धूप में चेहरे को झुकाए हुए बालों को लहराते हुए देखा था. वह हंसती जैसी दीपावली का अनार झलक आया हो. मैंनें उस पर अपना गुस्सा उतारते हुए कहा -वह गुस्सा होती तो मई की धूप का टुकड़ा लगती. सुबह छत पर जाती तब दोनों ओर गमलों की बीच महकती तुलसी की तरह लगती. उदास होती तो शाम के धुंधलके में घिरा हुआ फूल हो जाती। इस सब बातों के बीच यह बता दूं कि अब वह कली यानि मित्रो इस दुनिया में नहीं है. लेकिन इसलिए उसकी कहानी खत्म नहीं हुई. जब कोई इस दुनिया से कहीं चला जाता है तो क्या उसकी कहानी खत्म नहीं हो जाती ? क्योंकि व्यक्ति चला जाता है लेकिन उससे जुड़ा उसका मित्र मंडल और उसके बारे में सोचने वाले लोगों में उस आदमी की कहानी जिंदा रहती है. मित्रों के बारे में भी यही बात है. हम दोस्त उसके बारे में इस तरह से बातें किया करते थे. उसके बारे में और उसके आसपास के बारे में इत्मीनान से जानते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि वह एक कस्बे की लड़की थी. जैसे कि छोटे शहर होते हैं. छोटे शहर में एक मुख्य सड़क होती है. शहर की बाकी गलियां मुख्य सड़क की दासी सहचरी और सहेलियों की तरह उसे घेरे रहती हैं छोटी गली के बाशिंदे बड़ी गली की उपमा देकर अपने आप पर ताना कसते हैं कि वो गली कितनी अच्छी है. बड़ी गली के लोग मुख्य सड़क के लिए कहते हैं सारा कुछ उसी सड़क के किनारे हो रहा है. मुख्य सड़क के निवासी अपने से बड़े शहर की उपमा देकर अपने कस्बे के लोगों वस्तुओं सड़क़ों भवनों साफ सफाई नेतागिरी को तुच्छ ठहराते हुए जीते हैं. मित्रो भी यही सब किया करती थी. वह किताबों कहानियों ओर टीवी सीरियलों को देख कर अपने कस्बे की तुलना करती थी. बड़े घरों बड़े शहरों वाले माता पिता घर कुटुम्ब गली और अपने आपको कम या ज्यादा ठहराती. उसका कुल मकसद यह था कि उसे और उसकी सहेलियों को कोई बड़े शहरों की लड़कियों से कम करके क्यों आंकता है. मित्रो नाराज होकर अपनी मम्मी से कहती-ह्यह्यहओ ! तुम्हारे जैसो कोई नहीं करै मम्मी. तुम जरा जरा सी बातें लै कै..... अन्वि की मम्मी बिलकुल टोका टाकी नहीं करें.ह्यह्य मम्मी दहाड़ती-ह्यह्यदेख तू मेरी सरीगत किसी अन्वि की मम्मी से मत करू कर. तू हमें तो पागल समझती है. हम तेरे भले के लिए टोकते हैं.ह्यह्य ह्यह्यहमें ऐसो भलो नहीं चाहिए.ह्यह्य मित्रो के चेहरे पर कड़वाहट की परत चढ़ जाती थी. मां बेटी दो दिशाओं की तरह एक घर में घूमने लगती थीं . कुछ देर में विभाजन स्वत: मिट जाता जैसे दो कमरों की हवा दरवाजा खुलने के बाद एक हो जाती है. शाम होते ही मित्रो छत पर आ जाती . कमरे की तरह दिन की घुटन को हटाने के लिए खुली छत पर गहरी सांसों को सीने में भरती. उसकी सहेली सिमी ने एक दिन टोका था-ह्यह्यऐसी सांसें लेती है जैसे दूसरे दिन के लिए भर रही है.ह्यह्य मित्रो कहती-ह्यह्यताजी हवा है न.ह्यह्य सिमी कहती ह्यह्यकल बंद थोड़ी हो जाएगी.ह्यह्य मित्रो कोई उत्तर नहीं देती बल्कि सूरज को एक टक देखने लगती. ह्यह्यक्या हो गया.ह्यह्य सिमी टोकती. मित्रो पूछती -ह्यह्यबता मैं सड़क के तरफ क्यों देखती हूं.ह्यह्य सिमी चैंक जाती. वह सम्हल कर बोली-ह्यह्यकिसी का इंतजार है.ह्यह्य मित्रो सुनते ही हंसने लगी-ह्यह्य...तुम भी यार क्या....प्यार प्यार मुझे चिढ़ होने लगी है. अच्छे कपड़े पहनो तो हर कोई यही कहता है-प्यार करने लगी होगी. कुछ नया करो तो लोगों का अन्दाज प्यार से बाहर निकलता ही नहीं.ह्यह्य ह्यह्यप्यार से बाहर कोई निकले कैसे, घर से बाहर निकलें और निकलने दें तब न. ज्यादा से ज्यादा यहीं छत पर आ सकते हो. मैं अपने घर से तेरे घर पर ही तो आ सकती हंू. मैं और तू यहां से बाहर कहीं गए हैं क्या.. चाहे वो एन.सी.सी का कैंप हो पिकनिक हो या कहीं भी... देश दुनिया देखने को मिले तो प्यार की बातें छूटे. ह्यह्यरहने दे अब ज्यादा मत झाड़ . तू समझदार हो गई है. मित्रो हंसी थी. ह्यह्यहां एक दिन मैं सोच रही थी- अपने यहां के लोग कहीं घूमने नहीं जाते ओैर न जाने देते. ज्यादा से ज्यादा आसपास की शादियों में खाना खाने जरूर चले जाते हैं.ह्यह्य मित्रो सड़क को देख रही थी. मित्रो सड़क देख रही थी. सिमी ने मित्रो को बीच में खींचा. ठोड़ी पकड़ कर पूछा-ह्यह्ययार ये क्या है. ये मैं आज ही नहीं कई बार देख चुकी हूं. तू बोलते हुए बात करते हुए सड़क ही क्यों देखती है. थोड़ी देर पहले तूने पूछा था अब मैं तुझसे पूछ रही हूं कि तू सड़क क्यों देखती है. ह्यह्यतुझे नीचे चलना है.ह्यह्य मित्रो ने स्थिर स्वर में कहा. ह्यह्यमुझे नीचे नहीं चलना है लेकिन ये है कि तू किसका इंतजार करती है. बताती भी नहीं.ह्यह्य ह्यह्यमैं इंतजार तो करती हूं लेकिन किसी प्यार करने वाले का नहीं.ह्यह्यमैं जिसका इंजार करती हूं वह इस सड़क से कभी नहीं गुजरा. ज्यादा नहीे कुछ दिनों से उसकी याद ज्यादा आ रही है. इस छत पर आकर मुझे चैन मिलता हैं. सड़क को देखने से भरोसा आता है. जानती है क्यों, इसलिए कि सड़क पर हर चीज चलती हुई दिखती है. सिमी आंखें फाड़ कर उसे देखने लगी थी. उसकी आंखें सिकुड़ गईं.-ह्यह्य तू पागल हो गई. क्या हो गया तुझे... क्या अनजानी बातें करने लगी.ह्यह्य सिमी दोनों हाथ उसके कंधों पर रख कर देर तक मि़त्रों की आंखों में ताकती रही. जैसे वह उसके इंतजार करने वाले की शक्ल उसकी आंखों में खोजना चाहती थी.ह्यह्यतू समझी नहीं.ह्यह्य मित्रो ने सिमी के हाथों को अपने कंधों से हटाया-ह्यह्यएक बार और तुझे समझाती हूं-ह्यजब मैं छोटी थी...ह्यह्य ह्यह्यअब क्या बड़ी हो गई...ह्यह्य सिमी दादी की तरह बीच में बोली. ह्यह्य...अरे यार ... मेरा मतलब अब से छोटी थी...नानी ने इसी छत पर एक कहानी सुनाई थी. वह थी तो कुछ भी नहीं पर तू सुन ले कि हम दोनों यहां थें। सब लोग टीवी देख रहे थे. चांद खिला हुआ था. आसमान में इक्का दुक्का तारे बच्चों की तरह चमक रहे थे। उधमी बच्चों की तरह वे चांद से बहुत दूर थे. चांद के चारों तरफ धुधला सा एक घेरा था। मैंनें पूछा कि नानी चांद ऐसा क्यों है तो उसने बताया कि वह तुझे देख कर हंस रहा है. नानी ने एक कहानी सुनाई उसमें कुछ भी नहीं था- बस एक लड़का था. वो लड़का बहुत दूर से यहां आ रहा था. उसे हर इंसान प्यार करता था. वो एक राजकुमार था. वह यहां आएगा. इसी सड़क से गुजरेगा. तुझे प्यार करेगा और आसमानों में तुझे ले जाएगा. मैने नानी से पूछा वह कब आएगा? नानी ने कहा...आता होगा एक दो दिन में... दो दिन बाद मैंने पूछा तो नानी ने कहा-ह्यअपन ने कल जो फिल्म देखी थी . वह तो उसमें मर गया.ह्य मैंने नानी से कहा-ह्यपर नानी मुझे तो उसकी याद आने लगी है.ह्य नानी ने कहा यह तो बहुत अच्छा है. अब तू उसका इंतजार कर वह जरूर आएगा. नानी यहां से चली गई। मैंने उससे फोन पर कहा ह्यह्यआप तो मुझे वह लड़का दो आपने मुझे ऐसी कहानी क्यो सुनाई. वह लड़का फिल्म में क्यों मर गया. क्या अच्छे लड़के इस तरह क्यों मर जाते है. तो वो बोलीं-ह्यएक लड़का और है वह बिलकुल साधारण है लेकिन उसे पहचानना मुश्किल है. अब ये मैं उसके बारे में नहीं जानती कि कब वह इस सड़क पर से निकलता है. तुझे चाहिए तो तू रोज देख... कुछ दिनों में तुझे उसकी पहचान आ जाएगी. नानी को मैंनं फिर फोन लगाया तो उन्होंने कहा कि उनको बुखार आ रहा है. जल्दी ही भगवान उनके लिए आसमान से सीढ़ियां भेज रहा है. एक दिन मम्मी खूब जोर से रोने लगीं. किसी ने मुझे बताया कि तेरी नानी उपर चली गई. मुझे उनकी सीढ़ियों की बात याद आने लगी. मैंने सपने में बहुत लम्मी सीढ़ी देखी जिस पर नानी उपर जा रही हैं. मैं उनको आवाज दे रही हूं लेकिन वे नहीं सुन रही हैं. ह्यह्यअरे तो पगलाती क्यों है. परीक्षा की तैयारी कर.ह्यह्य ह्यह्यलेकिन मुझे उसकी बहुत याद आती है... नानी ने कहा था जिस दिन वह लड़का तुझे मिल जाएगा. उस दिन से मम्मी तुझे डांटना बंद कर देंगी. खूब घूमने जाने देगीं. पापा की पे बढ़ जाएगी. घर के कोने रोशनी से भर जाएंगे. सड़कें और गलियां साफ सुन्दर हो जाएंगी. झुग्गियों की जगह महल बन जाएंगे। लोगों की गरीबी दूर हो जाएगी. आसमान सात रंगों का दिखने लगेगा. तू ओर तेरी सहेलियां और खूबसूरत हो जाएंगी. लेकिन नानी ने कहा था तू उससे प्यार नहीं कर सकती. मैं सच में उससे प्यार नहीं करूंगी.ह्यह्य सिमी आंखें फाड़ कर उसका मुंह देखे जा रही थी. इससे पहले तो उसने मित्रो के बारे में इतना तो नहीं सोचा था. यह कैसी हो गई है. ...मित्रो बोल रही थी-ह्यह्यसिमी वह मुझे नहीं दिखा तो मैं जल्दी ही नीचे गलियों और सड़कों पर खोजने उतर जाउंगी.....ऐसा हुआ. एक दिन मित्रोे बिना बताए कहीं चली गई.

1 टिप्पणी:

  1. अच्छी रचना है इसका शीर्षक होना चाहिये " गमले में ऊगी हुई लड़की "

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