रविवार, 28 मार्च 2010

अब आए मोदी मुददे पर

ग ुजरात दंगा 2002 के मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर शुरू से आरोप लगाए जाते रहे हैं। ये आरोप दंगा पीढ़ितों, राजनीतिक दल, समाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा दर्ज कराए गए हैं। मोदी ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों का लगातार खंडन किया है। हालांकि पहली बार विशेष जांच दल न्यायिक अभिकरण के सामने मोदी झिझक के बाद पेश हुए। जांच दल ने कुछ मामलों में ही नरेंद्र मोदी से पूछताछ की है। ताजा पूछताछ दंगे में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया नसीम और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा लगाई गई याचिका पर हुई। अभी तक मोदी न्यायालय के सामने सीधे आने से बचने की भरपूर कोशिश कर रहे थे, जिसमें वे कुछ हद तक सफल भी रहे। हालांकि दंगों से संबंधित दो सम्मनों के बाद नरेंद्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट से अधिकार प्राप्त विशेष जांच दल के सामने आना पड़ा। टीम ने उनसे करीब नौ घंटे चली पूछताछ में 70 सवाल किए। एसआईटी इन सवालों के मार्फत दंगों के नीच दबी कहानी को खोल कर तरतीब देगी। हालांकि यह न्यायालयीन प्रक्रिया का हिस्सा है। पूछताछ के बाद नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया है कि भारत का संविधान और कानून सर्वोच्च है और वे भारत के संविधान से बंधे हए हैंं। क्या नरेंद्र मोदी नहीं जानते थे कि जब दंगे हो रहे थे तब भी वे मुख्यमंत्री के रूप में एक संवैधानिक पद पर थे। अब मुख्यमंत्री मोदी को सम्मन मिलने के बाद उनसे हुई पूछताछ उन लोगों को जरूर राहत मिली जो मोदी को इन मामलों में संदिग्ध की तरह देखते रहे हैं। आने वाले कल में और बातें सामने आएंगी। इस मामले में खास बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी भारतीय न्याय व्यवस्था से जोड़ कर देख रहा है।

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